69 साल पुरानी वीर गाथा को सलाम, पहले भारतीय पैरा कमांडो को कोरियाई वॉर हीरो का सम्मान

दक्षिण कोरिया ने 1950-53 के बीच हुए कोरियाई युद्ध में अहम भूमिका निभाने के लिए भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल (स्वर्गीय) ए.जी. रंगराज को अपने देश के सबसे बड़े युद्ध सम्मान ‘वॉर हीरो’ से सम्मानित करने का ऐलान किया है. 2020 में इस युद्ध को 70 साल होने जा रहे इसी अवसर पर दक्षिण कोरिया की ओर से इस सम्मान का ऐलान किया गया है.

दक्षिण कोरिया के वॉर-वेटरन मंत्रालय की ओर से हर साल युद्ध की याद में इस सम्मान का ऐलान किया जाता है. लेफ्टिनेंट कर्नल ए. जी. रंगराज की अगुवाई में 60वीं पैराशूट फील्ड एंबुलेंस ने नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच हुई जंग में मोबाइल आर्मी सर्जिकल हॉस्पिटल (MASH) को चलाया था. भारत की ओर से ये सुविधा तीनों साल के लिए शुरू की गई थी, इसी के लिए बाद में ए. जी. रंगराज को महा वीरचक्र से भी सम्मानित किया गया था.

सियोल में मौजूद कोरियन वॉर मेमोरियल में अगले साल जुलाई 2020 में लेफ्टिनेंट कर्नल ए.जी. रंगराज की बड़ी तस्वीर लगाई जाएगी. वॉर मेमोरियल में भारत के नाम का एक अलग सेक्शन बनाया गया है. इसके साथ ही कोरिया के कई सार्वजनिक स्थल पर भी बड़े कटआउट को लगाया जाएगा.

नई दिल्ली स्थित कोरियन एबेंसी के कर्नल ली इन के अनुसार, कोरिया की ओर से इस सम्मान को उनके महान काम के लिए दिया जा रहा है.

बता दें कि कोरियन वॉर में संयुक्त राष्ट्र की ओर से फोर्स भेजी गई थी, उस वक्त सोवियत यूनियन और चीन जैसे देशों ने नॉर्थ कोरिया का सपोर्ट किया था लेकिन भारत साउथ कोरिया के साथ खड़ा था.

हालांकि, भारत की भूमिका मुख्य तौर पर न्यूट्रल रही थी क्योंकि जिस मोबाइल मिलिट्री एंबुलेंस प्लाटून की अगुवाई ए. जी. रंगराज कर रहे थे, उसने युद्ध मैदान में काम किया था. ए. जी. रंगराज जिस प्लाटून की अगुवाई कर रहे थे उसमें कुल 627 जवान थे.

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